ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर
Friday, October 17, 2025
RTI Reminder Arya School Madina 28.09.2025
RTI Arya Senior Secondary School, Madina, Rohtak
RTI Or Mandatory Information Disclosure for any Trust or Society 1
Dear Concerned authority,
Director, Principal, Manager or Whoever
Arya Senior Secondary School, Madina, Rohtak
You are requested to provide the following details as per RTI
What is the name and registration number of the trust or society of Arya Sr. Secondary School?
In which year, it was founded?
Who are the members of this trust or society?
What are the rules and regulations governing this trust? Please provide a copy of all above.
How much property this trust has till now on different members' names? Give a chronology of the assets obtained over the years. It can be in the form of land purchase or building construction or lab or library formation or any vehicle purchased or any other such item.
Give a list of all sources of income of this trust.
How many students or teachers or other supportive staff, schools belonging to this trust or society have?
What is the fee structure or any other income resources of this trust?
What is the salary of teachers and other supportive staff on paper and in reality in your school/s?
What percentage or bonus, dearness allowances etc. teachers and other staff members get from the additional income?
What kind of updation or refresher courses, your school provide to teachers and other staff?
What is the time line, for teachers or staff updation or refresher courses?
How frequently have your teachers or staff members changed your school? What was the duration or reasons for their leaving your school?
Did any teacher, staff or student have any complaints against your school?
What is the criteria of conflict resolution in your school?
Do you listen to the concerned person, if there is any genuine problem or get rid off, because your management feels that person has no power or resources or even knowledge to challenge your school's wrongdoings?
Do you have any complaints regarding encroachment or wrongly taken over any land or property? If yes, what kind of resolution mechanism does your trust provide for that?
In the first place, why such a complaint is there if any, as you are registered a trust or society for the benefit of society, not to exploit vulnerable people. And why should not your registration be cancelled by the concerned authority?
One such verbal complaint was done by me, your younger cousin, Vijay Dangi and you said that you will provide the details of the bank account of that purchase. It did not happen till today. I had to take this route after much wait. You are requested again not just to provide the details of Sunil’s property along with your school but Ajay property also and any such property purchased by any member of this school’s trust or society.
You are requested to provide the following information in the form of print and soft copy via the same email from which you got it about Arya Senior Secondary School, Madina and related trust or society under Right to Information Act (RTI).
In case of print, please stamp and sign it properly on each and every page, along with date and page number. Whatever charges will be for print copies will be given in cash (bill mandatory). In case, you feel there would be charges even for soft copy via email, then please add them also.
Dr. Vijay Dangi
Mobile 9 .........
Monday, July 7, 2025
धोखाधड़ी और खास तरह का व्यवहार एक ही बात हैं? (6-7-2025 talk at aunty home)
6-7-2025 (श्याम का वक़्त है, टाइम देखा नहीं। शायद, 7.00 PM के करीब)
अभी आंटी को मिलने आए हैं। इस (ज़मीन) विषय पर फिर कभी बात करेंगे।
फिर कभी कब? फिर कभी तो मिलते ही नहीं आप। ना स्कूल मिलते और ना घर। वक़्त नहीं होता, इस विषय पर बात करने के लिए। ये क्या बता रहा है। साफ़ यही की धोखाधड़ी है। और भगौड़ा कौन होता है? जिसे पता होता है की उसने गुनाह किया हुआ है और अपने बचाव के लिए उसके पास कुछ खास नहीं है।
मंजू कल आ जाना स्कूल।
घर पे आए तो हुए हैं भाभी। यहाँ बात करने में क्या हर्ज है? वैसे भी आंटी ने बोला था की मैंने तो सुना है 30-35 लाख में दी है ज़मीन, 5-6 में नहीं। तो आंटी को भी कुछ तो पता ही होगा, क्यूँकि, अजय इस सबमें बिचौलिया है।
तू अजय को क्यों बीच में लेती है। जो मुझे पता था वो मैंने बता दिया।
धन्यवाद आप अभी तक अपनी जुबाँ पर हैं। ये भी बड़ी बात लग रही है, यहाँ के माहौल में। अब ये भी बता दें की घर की घर में ये अच्छी बात हुई है क्या। जो जमीन बेचना ही नहीं चाहते, उस ज़मीन को धोखाधड़ी से लेने की कोशिशें? इतने में नहीं भरा हुआ तो 2-कनाल में भर जाएगा क्या? और अजय का ही किया धरा हुआ है ये। ऊप्पर से किसी खास पार्टी के, कुछ खास लोगों द्वारा, उससे करवाया गया है।
मंजू तू कल स्कूल आ जाईयो।
भाभी स्कूल भी आई थी, याद हो तो। क्या हुआ?
अरे हम ही घर आ जाएँगे किसी दिन।
वो तो सबसे बढ़िया बात है भैया। बताओ कब आ रहे हैं?
वक़्त लगेगा तभी।
वक़्त लगाना तो अपने हाथ में होता है। जब चाहो लगा लो। ना चाहो तो कभी नहीं लगता। तो मुश्किल ही लग रहा है।
मंजू तू कल स्कूल आ जाना।
ठीक है भाभी। कितने बजे?
अरे स्कूल छोड़ो, हम ही घर आ जाएँगे।
भाभी कह रहे हैं तो स्कूल भी सही है भईया। वो वक़्त तो बता रहे हैं। आपको तो पता ही नहीं, कब वक़्त लगेगा।
3 बजे ठीक है
ठीक है
तुम आराम से बात करो। मुझे सिर दर्द हो रहा है।
सॉरी आंटी। मैं सिर दर्द करने नहीं आई आपको। ये लोग आते दिखे तो आ गई। क्यूँकि, कहीं और तो मिलते नहीं। और आप अभी तक अपनी जुबाँ पर टिके हुए हैं, उसके लिए धन्यवाद। यहाँ पे ऐसे लोगों की कमी लग रही है मुझे। आज के टाइम में, शायद जुबाँ पे टिकना भी बड़ी बात हो गया है।
7-7-2025 (2. 00 PM के करीब)
स्कूल चलेगी?
हाँ दीदी चल पड़ूँगी।
तो थोड़ी देर में चलते हैं। मैं अभी तक नहाई नहीं हूँ। नहा आती हूँ।
मैं भी नहीं नहाई हूँ दीदी। मैं भी नहा लेती हूँ।
थोड़ी देर बाद बाथरुम में बाहर से आवाज़ आती है भांजी की। मौसी, मम्मी ने फ़ोन किया था, मामा जी तो स्कूल नहीं हैं। कहीं गए हुए हैं।
ठीक है।
मैं नहा के स्कूल की तरफ निकल लेती हूँ। चलो इस बहाने थोड़ा घूम ही आऊँ। जब से मदीना आई हूँ, वॉक तो बंध ही हो गई है। यहाँ खेतों की तरफ जाने के सिवा, कहीं कोई साफ़-सुथरी जगह ही नहीं है।
स्कूल के रस्ते थोड़ी दूर एक गाडी दिखाई दे रही है। लग तो रहा है, लक्ष्य की है। जब तक दिखाई देता है, गाडी आगे निकल चुकी है। और आप मन ही मन सोचते हैं, तो ये स्कूल में ही था और इसे घर भेझ दिया?
थोड़ी दूर और चलने पर, भराण मोड़ के पास, अशोक भाई और भाभी दिखते हैं, गाडी में। आप धीरे हो जाते हैं। मगर, ये भी निकल जाते हैं, दूसरी तरफ मुँह करके, जैसे दिख ही ना रहा हो। और आप मन ही मन सोचते हैं। शिक्षा और ये व्यवहार? क्या कहलाता है? शिक्षा एक धंधा है? यहाँ कोई जुबाँ, कोई ईमान, कोई Manner या Coutesy नाम की चीज़ ही नहीं है? खैर। ऐसे-ऐसे धोखाधड़ी के मामले तभी होते हैं। वो सब शायद उनके व्यवहार में ही रचा बसा-सा हुआ है। मैं तो घूमने निकली थी। मेरे हिसाब से तो ये स्कूल थे ही नहीं। और मैं स्कूल वाले खेत तक घूमकर, वापस घर आ जाती हूँ।
Saturday, July 5, 2025
Not even an acknowledgement? Dhamaal Rohtak Police? 20.06.2025?
हमारे यहाँ पुलिस ऑफिस, कुछ केसों में एक aknowledgement तक नहीं देते? ऐसे ही अपने आप decide कर लेते हैं, की ये ना तो रजिस्टर करना और ना ही aknowledge?
शायद aknowledge तो हर complain का बनता है? क्यूँकि, कोई अगर आपके ऑफिस तक कोई समस्या रखता है, तो किसी उम्मीद में ही ईमेल करता होगा? कोर्ट उसके बाद ही आते होंगे शायद?
खासकर, पियक्क्ड़ों के केस में माँ, बहन, बेटी या घर की औरतों तक की अगर सुनवाई नहीं होगी, तो ऐसी-ऐसी और कैसी-कैसी ज़मीनें तो, so called बड़े या थोड़े से भी पैसे वाले लोग वैसे ही हड़प जाएँगे?
या शायद मैंने ही किसी गलत ईमेल पर भेझ दिया?
इसीलिए लोगों की इतनी औकात हो जाती है, की वो आपसे नहीं, बल्की, उन बेवकूफों से बात करते हैं, जो आसानी से उनके कहे में आ जाएँ? आपसे तो भागते हैं या भगा दिए जाते हैं, खास फ़ोन करके।
आर्य स्कूल मदीना? या खूनी स्कूल मदीना? 6.7.2025
बड़े दिनों बाद आज आखिर मुलाकात हुई, अशोक भाई से और साथ में उनके परिवार से, चाची को मिलने आए थे। मेरे जैसे तो सिर हो जाते हैं ऐसे ही? खासकर, जब लोग जमीन हड़पकर या ऐसा कोई काम या काँड कर, दूर-दूर भागने लगें? ऐसा ही?
बात तो वो आज भी नहीं करना चाह रहे थे। मगर, किसी की ज़मीन की तरफ गिद्ध निगाह रखकर, भागने से क्या काम चल जाएगा? वो ज़मीन ना आपकी थी, ना है और ना ही होगी। कम से कम मेरे ज़िंदा रहते। तो भाभी की तरह मेरा भी ईलाज कैसे करना है या कहाँ से करवाना है, तो शिक्षा के धंधे वाले लोगों से बेहतर किसे पता होगा?
ये पोस्ट खास उस जनता के लिए, जो ये ब्लॉग रेगुलर पढ़ रहे हैं। कल को अगर मुझे कुछ होता है, तो उसके पीछे ये (आर्य स्कूल मदीना? या खूनी स्कूल मदीना?) और इनकी खास-म-खास पार्टी होगी। वो पार्टी, जो ना सिर्फ इस पीने वाले भाई की ज़मीन के पीछे है, बल्की चाहती ही नहीं, बल्की, पूरी कोशिश में है की येन केन प्रकारेण दूसरे भाई की ज़मीन भी हड़प लें। इन लोगों के शब्द सुनकर तो ऐसे लगता है, जैसे सब दान करने के लिए बैठे हैं इन्हें।
यूनिवर्सिटी उसमें लगता है पूरी सहायता कर रही है, मेरा पैसा रोककर।
You are requested again publically, give me my whole amount without any further delay. As an higher education system, you have already given her so much opportunities to grow personally and professionally that their signs are so evident in her life, body and all around her.
Sunday, May 11, 2025
यूनिवर्सिटी की फाइल्स या इमेल्स और गाँव के स्कूल वालों की घड़ाई (Parallel)?
शिक्षा और राजनीती का क्या लेना-देना है, इस केस में?
राजनीती का तो सारा ही है। समाज की सब समस्याओं की जड़ है राजनीती। हालाँकि, समाधान भी वहीं हैं। मगर राजनीतिक रस्तों से अगर समाधान निकालने की कोशिश करोगे, तो शायद आपकी ज़िन्दगी ही नहीं, आपकी कई पीढ़ियों की ज़िंदगियाँ खप जाएँ।
कोर्ट्स का भी कुछ-कुछ ऐसे ही है। कई केसों में तो कोर्ट्स भी लल्लू-पंजू से नजर आते हैं। ऐसा क्यों? ये शायद खुद कोर्ट्स बता पाएँ? कोर्ट्स इस सिस्टम में खुद एक कोढ़ (कोड) हैं।
इंसान, अच्छे-बुरे हर जगह और हर प्रॉफेशन में हैं। कितनी, कब, कहाँ और किसकी चलती है, ये अहमियत रखता है, शायद। नहीं तो कितना कुछ कोर्ट्स तक, अपने सामने होते हुए भी, बेचारे से, लाचार से देखते हैं? जैसे उनके पास कोई रस्ता ही ना हो? खैर। शिक्षा का भी कुछ-कुछ ऐसे ही है। ये ज़मीनखोरी का एक छोटा-सा, तकरीबन-तकरीबन उसी वक़्त दिखाया-बताया जा रहा उदहारण है। जहाँ गाँव का कोई छोटा-सा स्कूल, कैसे किसी सामान्तर घड़ाई का हिस्सा बन, अपने ही चाचा, ताऊओं के बच्चों पर मार कर रहा है?
यूनिवर्सिटी की फाइल्स या इमेल्स और गाँव के स्कूल वालों की घड़ाई? है ना मजेदार?
वैसे मेरी यूनिवर्सिटी की बचत का अभी क्या चल रहा है?
भाभी की मौत के बाद, मैंने अपने नॉमिनी बदलवाने के ईमेल की। मगर हुआ कुछ नहीं। बल्की, इधर-उधर से चेतावनियाँ आनी लगी, की ऐसा मत करो। ऐसा हुआ तो, तीनों बहन-भाईयों को साफ़ करने की साज़िश है। और ऐसे लोगों के लिए, फिर गुड़िया को औना-पौना करना कितना मुश्किल होगा? समझ ही नहीं आ रहा था की क्या, कहाँ और कितना सच था। मगर मुझे भी लगा, वैसे भी जब इस घर में बच्चा ही एक है, तो अभी तो सब उसी का है। अगर तीनों बहन-भाईयों को ख़त्म करने जैसी कोई साज़िश चल रही है, तो भी उसी का है। मगर ऐसे में, वो भी कितना सुरक्षित होगी? और मैंने कुछ नहीं किया, जो पहले से नॉमिनी थे, वही रहे। ना ही यूनिवर्सिटी ने ईमेल के बावजूद बदले। बचत दो पर ईमेल होती रही।
एक दिन यूनिवर्सिटी ने उसके लिए भी बुलाया। उसकी पोस्ट मैं पहले लिख चुकी शायद, की कुछ अजीब-सा चल रहा था। मेरे कहने के बावजूद, मेरे घर का पता नहीं बदला गया। मैंने सारे पैसे एक साथ देने को बोला, तो उन्होंने कहा की ऑप्शन ही नहीं है।
जबकी कहीं और, ये ऑप्शन, मैंने पढ़ी और सुनी थी।
कहने को मैं sign कर आई, मगर साथ में concerned official को ईमेल भी कर दी, जो कुछ वहाँ हुआ या मुझे समझ आया, उसके बारे में। तो अगर वो पता तक अपडेट नहीं कर रहे, तो उन sign के भी क्या मायने हैं?
आप कूट, पीट, लूटकर निकाल चुके हैं। तो छोटी-मोटी बचत तो शायद सारी दे ही देनी चाहिए।
अब NSDL या Protean के नाम पर फ्रॉड इमेल्स के ड्रामे शुरु हो चुके थे। समझ ही ना आए, की कौन-सी ईमेल कहाँ-से है? या NSDL की कितनी ऑफिसियल वेबसाइट या ईमेल Id हैं?
वहाँ भी ईमेल में जवाब यही था, की मुझे मेरा सारा पैसा दे दो। ताकी यहाँ अपना कुछ बंदोबस्त कर, आगे कुछ किया जाय। इस बीच जमीनखोर लोग, अगर फिर से कुछ खुरापात कर रहे हैं, तो इसका मतलब क्या है? क्यूँकि, यूनिवर्सिटी और गाँव में आसपास काफी कुछ कोआर्डिनेशन में चलता है।
और ये लड़कियों के हकों पर राजनीती करने वालों के लिए भी। किसी की ज़मीन को यूँ, इतनी टिक्कड़बाज़ियों से, किसी प्राइवेट स्कूल की तरफ खिसकाना, क्या कहलाता है? सिर्फ माँ गई है बच्ची की। बुआ, बेटी दोनों घर बैठी हैं। और हाँ। एक और बुजुर्ग औरत भी है इस घर में, दादी। तो यहाँ शायद, कोर्ट्स भी बेचारे और लाचार ना हों?
स्कूल और दो कनाल ज़मीन (Protection?) 10
स्कूल और दो कनाल ज़मीन (Protection?)
(ये पोस्ट दिसंबर 2024 की है, जब ये सब चल रहा था तभी की)
सुना है उसकी जान को खतरा है? शराब से? या दो कनाल से? या किसी और चीज से?
जिन्हें राजनीतिक जुए की मार आम लोगों पे कैसे-कैसे होती है, को जानना हो, वो इस शराब लत वाले इंसान पे फोकस कर सकते हैं। बहुत-सी मौतों के राज समझ आएंगे और तारीखों के भी। वो शराबी नहीं है, उसे शराबी सिस्टम की जरुरतों या कहो पार्टीयों की जरुरतों ने बनाया है। थोड़ा ज्यादा हो रहा है ना? और उसपे मैं ये कहूं की ये ज्यादातर आम-आदमियों पे लागू होता है। सिस्टम।
बड़े लोग सिस्टम को बनाते हैं, अपनी जरुरतों के अनुसार। और आम-आदमी बनता है, उनकी जरुरतों का मोहरा, गोटी। इनमें वो भी हो सकते हैं, जो आज इस सिस्टम की या किसी एक पार्टी की जरुरत के अनुसार, इस सामाजिक सामान्तर घड़ाई का हिस्सा बन चुके हैं। जिस किसी वजह से। अगर आप गाँव के किसी स्कूल से सम्बंधित है, तो थोड़ा बहुत पैसा और ठीक-ठाक ज़िंदगी होते हुए भी, सामाजिक सँरचना के पिरामिड में आखिर वाले पायदान पे ही हैं। गाँव आज भी पिरामिड का वही हिस्सा हैं। हाँ। उस गाँव वाले पिरामिड में हो सकता है, स्तिथि थोड़ी-सी सही हो।
सिस्टम एक पिरामिड है। इस पिरामिड के तीन अहम हिस्से हैं।
उत्पादक (Producers) : पैदा करने वाला, जैसे खाना, कपड़ा और मकान। और भी कितनी ही तरह के उत्पाद, जो इंसान प्रयोग करता है।
उपभोगता (Consumers) : प्रयोग करने वाला
सफाई कर्मी (Decomposers) : साफ़-सफाई करने वाले, किसी भी तरह की
जहाँ इन तीन हिस्सों में संतुलन है, वो घर, परिवार या समाज संतुलित है। वो इंसान संतुलित है। जहाँ इनमें से किसी एक में भी कहीं कुछ गड़बड़ है या असंतुलन है, वो समाज असंतुलित है। वो सिस्टम असंतुलित है। वो घर, परिवार, इंसान असंतुलित है।
स्कूल और दो कनाल ज़मीन का इस सबसे क्या लेना-देना?
सामाजिक सामान्तर घड़ाई
चलो एक दारु-लत वाले इंसान की कहानी सुनते हैं । सुना है उसकी जान को खतरा है? शराब से? या दो कनाल से? या किसी और चीज से?
शायद इसीलिए, भतीजे ने (दूसरे दादा के बच्चे, रोशनी बुआ वाला घर), वो ज़मीन खरीद ली? क्यूँकि, उसने खुद ऐसा बोला की बुआ Protection के लिए ली है। हम नहीं लेते, तो कोई और लेता। किसके और कैसे Protection के लिए? ये समझ नहीं आया बुआ को। ये शराब दो और ज़मीन लो के गाँवों में ही इतने किस्से क्यों मिलते हैं?
सबसे बड़ी बात, क्या वो ज़मीन बिकाऊ थी? सुना, कुछ वक़्त पहले तो वहाँ स्कूल बनने वाला था। भाभी के जाने के बाद, शायद कोई छोटी-मोटी रहने लायक जगह या कुछ ऐसा-सा ही। बुआ को हमेशा के लिए गाँव रहना नहीं, तो किसके काम आता वो? अरे वो तो पैसा यूनिवर्सिटी ने रोक रखा है ना? वैसे यूनिवर्सिटी की उस छोटी-मोटी बचत में, मैं अपने नॉमिनी बदलने की रिक्वेस्ट भी दे चुकी, काफी पहले। मगर, जाने क्यों आज तक यूनिवर्सिटी ने ना वो नॉमिनी बदले और ना ही मुझे अभी तक वो पैसा दिया। जाने क्या-क्या होता है दुनियाँ में? और क्यों होता है? क्या इसीलिए, की ये थोड़ी-सी किसी भाई की, खास जगह वाली ज़मीन बिकवाई जा सके? क्यूँकि, अब जो नॉमिनी में नाम हैं, उनमें एक ये है, जिसकी ज़मीन बिकवाई गई है। और दूसरा नाम भतीजी। माँ और छोटे भाई का हटा दिया, क्यूँकि उन्होंने कहा की उन्हें जरुरत नहीं है। इस भाई का जैसे अपहरण किया हुआ है और बोतल सप्लाई हो रही हैं। उस हिसाब से तो जल्दी ही खा जाएँगे इसे। या इसीलिए कुछ अपने कहे जाने वाले लोग, किसी गरीब का फायदा उठा रहे हैं? बहन तो कोई सहायता कर नहीं सकती, इस हाल में? बचा कौन? माँ तो वैसे ही आई-गई के बराबर है? भाई क्यों और कब तक भुगतेगा, ऐसे इंसान को?
वैसे घर पे माँ-बहन को तो जरुर बताया होगा, ये जमीन खरीदने वाले अपनों ने? क्यूँकि, वो माँ के पास घर आता-जाता था और खाना भी वहीं खाता था। कुछ होता तो हॉस्पिटल बहन लेके जाती थी। दो बार तो शराब के नशे की वजह से एडमिट भी हो चुका और deaddiction सेंटर भी जा चुका। ये अजीबोगरीब किस्से-कहानियाँ कैसे और कहाँ-कहाँ जुड़े हैं, ये किन्हीं और पोस्ट में। अगर नहीं संभाला गया होता, तो कितने ही उसके आसपास वालों की तरह, राम-नाम-सत्य हो चुका होता।
मगर जबसे ये ज़मीन के चर्चे शुरू हुए, खासकर भाभी के जाने के बाद, तबसे कुछ और भी खास चल रहा है। बंदा जैसे अपहरण हो रखा हो। कई-कई दिन फ़ोन बंद। उठाए तो टूल। बहन तो अब तक deaddiction centre भेझ चुकी होती, ऐसे हाल में। मगर, अबकी बार कुछ गड़बड़ है शायद? उसे शराब से दूर और पोस्टिक खाने की खास जरुरत है। मगर कहाँ का खाना, जब शराब देके सब निपट जाए?
लगता है Protection के लिए काफी पैसे दे दिए? शराब पीने वाले को पैसा? उसे बचाने के लिए या उसका राम-नाम सत्य करने के लिए? अरे नहीं, पैसे उसे नहीं दिए। सिर्फ कोर्ट के जमीन वाले पेपर्स पे ऐसा लिखा है। 1 लाख सामने ही एक पड़ौसी हैं, उन्हें दिए हुए हैं। इन्हीं पडोसी ने बताया, की उन्हीं में से थोड़े-बहुत ले लेता है। 1.5 लाख और कहीं बताए, उस पड़ोस वाले भाई चारे ने। घर वालों से क्या खतरा था, उन्हें क्यों नहीं? अगर ये भी मान लें, की माँ या भाई ने बोलना ही छोड़ दिया है उससे, तो बहन के बारे में क्या कहेंगे? सबसे बड़ी बात, बहन जमीन खरीदने वालों के घर तक गई, जब सामने आया की ऐसा कुछ चल रहा है, या हो चुका। अपना समझ के, की ये मामला क्या है? और खरीदने वाले की माँ बोले, हमें तो खबर ही नहीं? लगता है स्कूल प्रधान चाचा को भी, अब तक भी खबर नहीं हुई? बाकी फोन उठाना या मेसेजेस का जवाब देना, शायद उसके संस्कारों में नहीं। कितने संस्कारी लोग हैं?
विपरीत परिस्तिथियों का फायदा उठाओ और हालात के मारे को और जल्दी ऊपर पहुंचाओं? बहुत-सी बातों और हादसों पर यकीन नहीं होता। ऐसे, जैसे ज़मीन के पेपर आपके पास आ चुके हों। बेचने, खरीदने वाले और गवाहों के फोटो और अजीबोगरीब-सा, पैसे का हिसाब-किताब भी। ज़मीन, वो भी उस जगह, सच में इतनी सस्ती है? कोड़ी के भाव जैसे। कुछ वक़्त पहले, मैं खुद ज़मीन ढूढ़ रही थी, यहीं आसपास। मुझे तो इतनी सस्ती ज़मीन, कहीं सुनने को भी नहीं मिली। ये स्कूल वाले देंगे इतने में? खुद इन्होंने अभी पीछे काफी किले खरीदे हैं, कितने में? वो भी पानी भरने वाली बेकार-सी ज़मीन। इस ज़मीन के साथ वाली ज़मीन नहीं। शायद इसीलिए, माँ-बहन से बात तक नहीं करना चाहते?
उसपे ये गवाह कौन हैं? क्या खास है उनमें? घर या आसपास से ही कोई इंसान क्यों नहीं? घर वालों के क्या आपस में जूत बजे हुए हैं? या वो देने नहीं देते? जिसकी बहन कल तक खुद ज़मीन देख रही थी, वहीं आसपास, वो वहीं की ज़मीन क्यों बेंचेंगे? मतलब, धोखाधड़ी का मामला है?
कोर्ट्स को शायद इतना-सा तो कर ही देना चाहिए की किसी को कोई आपत्ति है या नहीं, जैसा एक नोटिस, कम से कम पुस्तैनी ज़मीनो के केसों में घर तक पहुँचवा दें, अगर ज़मीन किसी के नाम हो तो भी। अगर ऐसा हो जाए, तो कितनी ही औरतें या परिवार वाले, बेवजह के कोर्ट्स के धक्कों से बच जाएँ। हमारे इन रूढ़िवादी इलाकों में हक़ होते हुए भी, पुस्तैनी जमीनों को ज्यादातर आज भी, माँ, बहनें नहीं लेती। मगर इसका अर्थ ये भी नहीं होता, की कोई भी ऐरा-गैरा, नथू-खैरा या जालसाज़ उन्हें धोखे से अपने नाम कर ले। कोई इंसान पिछले कई सालों से दारु की लत से झूझ रहा हो, तो उसका मानसिक संतुलन सही है या नहीं, ये सर्टिफिकेट कौन देगा? वो जो सालों से उसे झेल रहें हैं, और बचाने की कोशिश कर रहे हैं? या वो, जिनकी निगाह, उसकी ज़मीन पे हैं? और ऐसे लोगों को ये ज़मीनों के खरीददार, पैसे भी देते होंगे? कुछ बोतल ही काफी नहीं होंगी? उसकी कहानी किसी और पोस्ट में। क्यूँकि, ऐसी कई कहानियाँ आसपास से सामने आई।
अपने ही आदमी हैं? घर कुनबा है? इसीलिए, पब्लिक नोटिस लगाना पड़ रहा है, की किसी सुनील की कोई ज़मीन ना बिकाऊ थी, ना है। शराब लत वाले इंसान को बोतल देके, ज़मीन लेने की कोशिश ना करें। और अगर ये पेपर सच हैं, जो मेरे पास थोड़ा लेट पहुँचे हैं शायद, तो इसका साफ़-साफ़ मतलब ये है, की खरीदने वाला भगोड़ा इसीलिए हो रखा है की धोखाधड़ी है। वरना, मैसेज करो तो जवाब नहीं और घर जाओ तो गुल हो जाता है, भतीजा।
सामाजिक सामान्तर घड़ाई मुबारक हो। आखिर इस पीढ़ी का नंबर भी तो, कहीं न कहीं से तो शुरू होना ही था? कितना बढ़िया हुआ है ना? अच्छा लग रहा है? बेहतर होता, अपने आसपास की सामाजिक सामान्तर घड़ाइयों से सीख लेके, ऐसे ओछे गुनाह से बचते। अगर शराबी चाचा की सच में कोई फ़िक्र होती, तो उसके वो हाल ना होते, जो हो रखे हैं। वो आजकल है कहाँ और रहता कहाँ है, या खाना वगैरह कहाँ खाता है, ये तो अता-पता जरूर होगा? भगोड़ा होने की बजाय, बेहतर होगा की बुआ से संपर्क करें।




