Sunday, November 9, 2025

ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर 27

 लड़कियों के ज़मीनी अधिकार 

ज़मीनी ही क्यों? लड़कियों के प्रॉपर्टी के अधिकार लिखना चाहिए। वो फिर चाहे कैसी भी प्रॉपर्टी क्यों ना हो।  

वक़्त आपको काफी कुछ सिखाता है। बुरा वक़्त भी और भला वक़्त भी। कुछ ऐसा, जो सिर्फ वही वक़्त सिखा सकता है। ना कोई इंसान और ना ही कोई शिक्षक। एक ऐसा इंसान, जो अभी कुछ महीने तक भी कह रहा हो की मैं, मैं भला यहाँ ज़मीन का क्या करुँगी? और फिर, इतनी है ही कहाँ, जिसके लिए बँटवारा हो? अचानक से बदल जाता है? नहीं अचानक से नहीं शायद? काफी कुछ देखने, भुगतने और सुनने के बाद? खासकर, जब किसी ख़ूनी स्कूल को उस ज़मीन पर अपने पैर पसारते देखता है? और वो भी कैसे? धोखे से? चालबाज़ी से? कैसे-कैसे घिनौने हथकंडों से? वो ख़ूनी स्कूल जो जाने कहाँ कहाँ रिस्वत देकर आगे बढ़ा है। सिर्फ रिस्वत देकर? या दादागिरी और गुंडागिरी से भी? लिखना चाहिए की हर तरह के हथकंडे अपना कर। 

चलो छुटभैईयों को तो नहीं मालूम की लड़कियों के कोई ज़मीनी अधिकार भी होते हैं? वो तो कम पढ़े लिखे या गँवार हैं? जो पिछले 25 साल से एक स्कूल चला रहे हैं, क्या उन्हें भी नहीं मालूम की लड़कियों के पैदाइशी ही कोई ज़मीनी अधिकार होते हैं? इतने भोले और शरीफ़ हैं वो?

तो कोर्ट उन शरीफ़ों को ये बताने का काम करेंगे क्या?  

efiling services for litigants?

online courts?

या 

Virtual Courts?  

अगर ये ऑनलाइन हैं तो कम से कम ज़मीन का डाटा भी इनके पास ऑनलाइन ही होगा? नहीं होगा तो एक ईमेल से concerned department को ईमेल करने पर वो मिल सकता है। कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। हम जैसों को भी अगर ऐसी कोई ईमेल सुविधा मिल जाए तो अच्छा हो। क्यूँकि जमाबंदी वाली वेबसाइट लेटेस्ट डाटा नहीं निकाल रही। 2021 तक का ऑनलाइन दिखा रही है और उसको भी देने में आना कानी। अब वो आना कानी जो मेरे लैपटॉप को अपने कब्ज़े में रखते हैं, उनकी वज़ह से है या उस वेबसाइट की ही दिक़्क़त है? ये भी ऑनलाइन कोर्ट्स को ज्यादा मालूम होगा। क्यूँकि, उनके पास ऐसा जानने के सँसाधन हैं। 

तो इतने छोटे से काम के लिए किसी भी शिकायत कर्ता को, शायद वकील की जरुरत नहीं होनी चाहिए। जब सारा डाटा ऑनलाइन है, तो ये तो ऑनलाइन ही पता चल जाएगा, की किसी भी परिवार में कितने सदस्य हैं और उनकी कितनी ज़मीन और कहाँ-कहाँ है। और किसके नाम कितनी होनी चाहिए। ऑनलाइन ही वो बाँट दी जाए और ऑनलाइन ही उसके पेपर मिल जाएँ। नहीं तो पटवारी संसाधनों वालों के चककरों में आकर, थोड़ा बहुत खुद खाकर, किसी और की ज़मीन किसी के नाम किए मिलेंगे और फिर उसे ठीक करवाने के चक्कर में, यही संसाधनों वाले बाकी ज़मीन को भी अपने नाम धरे मिलेंगे। उस लड़की तक की जो लिखित तक में कह चुकी हो की नहीं बेच रहे हैं। ये कहकर की तेरे तो नाम ही नहीं है। कल को ऐसे लोगों को कोई ऐसा भी फरहा दिखा सकता है की लड़की को हमने खरीदा हुआ है और बेच रहे हैं। खरीद लेंगे ये उसे, और कह देंगे की तुम तो तुम्हारे नाम ही नहीं हो। बेहुदा और घटिया किस्म के गुंडे जो ठहरे?

और यहाँ तो मसला सिर्फ मेरे नाम की ज़मीन का ही नहीं है। 

बल्की, उस पियक्कड़ की ज़मीन का भी है, जो आजकल सुना है, किसी बिहारी इलेक्शन में कोई खास भूमिका, किसी खास पार्टी की Dal housie  में निभा रहा है? अब ये किसके और कैसे कोड हैं, ये भी इन कोर्ट्स को ही ज्यादा पता होंगे। अब ये गुप्त सुरँगे, उसे सही सलामत वापस घर पहुँचायेंगे या इनके अगले काँड का वक़्त हो गया है? 

और उस लड़की के भी हक़ का सवाल है, जिसकी माँ के दुनियाँ छोड़ते ही ये ज़मीनी हेरफेर वाला काँड रचा गया। अभी वो नाबालिक सही, मगर कोई सेफ्टी तो उसे भी चाहिए, बाप के ज़मीनी अधिकार से। ये गुपचुप छुपे तरीके से वो भी स्टेकहोल्डर्स से, ज़मीनों के धंधे करने वालों को कोई तो मैसेज जाए, की बहुत हो चुका। अब और दादागिरी नहीं।  

Thursday, November 6, 2025

ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर 26

 efiling services for litigants?

online courts?

Virtual Courts?

तरीका अच्छा है, संसाधनों के उपयोग का। मगर कितना सफल हो पाएगा, एक ऐसे जहाँ में, जहाँ आपका लैपटॉप, उनका लैपटॉप? आपका लिखा, जैसे उनका लिखा? जो चाहें वो बदल दें?

कोई आपको सुन रहा है, जैसे इसका श्रेय मेरे हिसाब से तो CJI, चंदरचुड़ को ही जाएगा। अब वो कोड भाषा में कौन हैं? उनके पिछे कितनी बड़ी टीम है? और वो कैसे काम करते हैं? ये अभी तक भी शायद आम जनता की जानकारी में ज्यादा नहीं है। खैर। 

31st Jan या 1st Feb 2023 की रात रितु की मौत और उसके बाद के घटनाक्रमों ने और भी काफी कुछ बताया और दिखाया।   

उसके बाद गुड़िया का जैसे किडनैप होना। घर की घर में? या अड़ोस-पड़ोस में? 4th क्लास के पेपरों में ही इतने सारे तमाशों का होना। 

उसका स्कूल बदला जाना। RKP, मदीना से HD, बहुअकबरपुर। और मेरे कान खड़े होना। Danger Zone या क्या?

सितम्बर 2018, साइको और Chail का HD से क्या लेना देना है? और क्यों?

ये किसी ने क्या लिखा, "और एक प्राइवेट स्कूल ने बच्ची को ही किडनैप कर लिया।"  

10 April, 2019 और H#16, Type-3, और सज्जन दहिया टीम और मार पिटाई केस? ये साँग क्या था?

10 April और 2025 और NDTV? ये तमाशा क्या था? और किसके द्वारा?  

NDTV और Youtube? ये रिस्ता क्या कहलाता है? 

वैसे मुझे किसी भी नाम के A से शुरु होने से थोड़ी दिक्कत हो सकती है क्या? वो फिर चाहे कोई महीना ही क्यों ना हो। जैसे April, ऐसे जैसे Andhra? या कोई लॉजिक नहीं बनता? 

ये SUPREME COURT किनके द्वारा बनाए और कैसे विडियो हटवा रहा था? मेरे लैपटॉप से कोई हिस्ट्री ही क्यों डिलीट करवा दी?

इन सबके बीच में Arya Sen Sec School, Madina द्वारा, उस स्कूल के साथ लगती हमारी ज़मीन को रितु के जाते ही ऐसे हड़पने को क्या कहते हैं?

कल मैंने efiling services for litigants (?) पर ये केस फाइल करने की कोशिश की, मगर ये क्या चल रहा था? मैंने as a litigant रजिस्टर किया है। मगर फिर भी वो एडवोकेट सर्टिफिकेट माँगे? समझ नहीं आया। Explain Please. 

हाँ। जो कुछ वहाँ फाइल करना था, वो पढ़ने वाले पढ़ चुके और थोड़े बहुत शायद उसमें बदलाव भी कर चुके? तो शिकायत फाइल हुई ही समझी जाए।